किसान बिल के विरोध-प्रदर्शन में किसानों की मौत का कोई डेटा नहीं, फिर मुआवजे का सवाल कैसा? - संसद में बोली सरकार

19 नवंबर को प्रधानमंत्री ने कहा था, "देश से माफी मांगते हुए मैं सच्चे और शुद्ध मन से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में कुछ कमी थी कि हम अपने कुछ किसान भाइयों को सच्चाई नहीं समझा सके।" उन्होंने यह कहते हुए प्रदर्शनकारी किसानों से घर लौटने की अपील भी की थी।

किसान बिल के विरोध-प्रदर्शन में किसानों की मौत का कोई डेटा नहीं, फिर मुआवजे का सवाल कैसा? - संसद में बोली सरकार
किसान संगठनों का दावा है कि किसान आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हुई है।

संसद में केंद्र सरकार ने कहा है कि उसके पास किसान आंदोलन (Farmers Protest)  के दौरान मरने वाले किसानों और उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामलों की जानकारी ही नहीं है। ऐसे में किसी को वित्तीय सहायता यानी मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar)  ने संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में एक सवाल के जवाब में लोकसभा में अपना ये लिखित जवाब दिया है।

बता दे कि, संसद में सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार के पास आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई आंकड़ा है और क्या सरकार उनके परिजनों को वित्तीय सहायता देने की सोच रही है? इसके जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का ये जवाब आया है। मंत्री ने ये सदन को ये भी बताया कि केंद्र सरकार ने किसान नेताओं के साथ 11 राउंड की बातचीत की थी लेकिन बात नहीं बन सकी।

19 नवंबर को प्रधानमंत्री ने कहा था, "देश से माफी मांगते हुए मैं सच्चे और शुद्ध मन से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में कुछ कमी थी कि हम अपने कुछ किसान भाइयों को सच्चाई नहीं समझा सके।" उन्होंने यह कहते हुए  प्रदर्शनकारी किसानों से घर लौटने की अपील भी की थी।

उधर, किसान संगठनों का दावा है कि आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हुई है। आपको बता दें कि 11 दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया था और किसानों से इसके लिए माफी भी मांगी थी।